आर्थिक गुलामी के दौरान आज मिला था बाजार में ५०० का नोट, ये है तो बेजुबान पर इसने अपने बारे में जो कहा वो कुछ इस तरह से है, की मैं आजाद रहने वाला आज सरकार के कैद में हूँ और मेरी कीमत जो सबसे ज्यादा और महत्वपूर्ण थी उसकी जगह अब एक प्रधान सेवक ने ले ली है, कभी ५०० और हजार के नोट के आगे कोई सरकार, कोई सेवक बड़ा नहीं था और न ही कभी किसी एक खास व्यक्ति का मैं गुलाम नहीं था सब के लिए बराबर था और सब की जरूरत को ये नोट पूरा करता था लेकिन आज सबकी जरुरत को पूरा एक खास व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है और जनता वाह-वाह कर रही है !! आज कल उस खास व्यक्ति ने अपने हिसाब से सब की जरुरत को निश्चित कर दिया है की कौन कितने नोट निकाल सकता है क्या चलेगा और क्या बंद होगा, उचित रूप से जब मैं बाजार में था तो सबकी जरुरत पूरी करता था पर आज मेरा वज़ूद ही नहीं कुछ और है भी तो कुछ ज्यादा नहीं जैसे की मैं उस खास व्यक्ति के कहे अनुसार मज़बूर हूँ की बीमार को इलाज़ की जरुरत है पर मैं उसके जरुरत के हिसाब से उसके पास मौजूद नहीं हूँ, वयापारी को व्यपार की जरूरत है पर मैं उसको अपनी तरफ से कोई साधन और संसाधन नहीं दे सकता हूँ, लेकिन हो सकता है की जैसे मैं सरकार का गुलाम बन गया हूँ वैसे सारे वयापारी बन जाये तो शायद उनका वयापार फिर से चल पड़े, लोगो को शादी के लिए मेरी (नोट) जरुरत है और इस संकट का असर उन लोगो के ऊपर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है पर क्या कर सकते है, सबकी जरुरत नोट है और हर एक असम्भव को मैं सम्भव कर सकता हूँ पर ये तभी मुमकिन होगा जब मैं फिर से आजद होकर जनता और लोगो के बीच में घूम सकता हूँ लेकिन एक खास व्यक्ति और सरकार ने मुझे गुलाम बना दिया और फिर जनता और लोग खुद ही उसका गुलाम बन गयी फिर भी वाह-वाह मतलब की सभी लोग तो आमिर नहीं है और न सब वयापारी पर जो आमिर है और व्यपारी है वो मुझे आज भी आजाद देखना और रखना चाहते है, पर जो गरीब है और नौकर है वो तो पहले भी गरीबी का गुलाम था और जो किसी की नौकरी करता है वो भी अपने मालिक का गुलाम है और गुलामो को क्या फर्क पड़ता है आर्थिक गुलामी से वैसे भी इनकी जरुरत को पूरा करने वाला एक खास व्यक्ति विशेष तो है ही पर, मुझ नोट का क्या होगा मुझे कौन आजाद करवाएगा ये काम न तो किसी आमिर के बस की बात लग रही है और न किसी वयापारी के मगर जो गरीब, गरीबी का गुलाम है और जो नौकर मालिक का गुलाम है वो अपनी आजादी के लिए आवाज़ बुलंद करे तो मैं आजाद हो सकता हूँ !! जिन्हों ने मुझे गुलाम बनाया उनके अनुसार मुझे फिर से आजाद कर दिया जायेगा और ये दिक्कत थोड़े दिनों के लिए है पर मुझे तो लगता है की ये दिकत तब तक है जब तक ये गुलाम बनाने वाली सरकार है और सबके सर पर चढ़ कर बैठने वाला ये एक व्यक्ति विशेष है !! और मैं ये तो बताना ही भूल गया की ये जो वाह - वाह करने वाले लोग है वो इस सरकार के और इस खास व्यक्ति विशेष के खास गुलाम है जिनको सरकारी तौर पर अंदर ही अंदर खास सहूलियत मिला हुआ है जैसे की मुझे (नोट को) गुलाम बनाये जाने से पहले इन सबको सूचित कर दिया गया था की सब अपना इंतज़ाम कर ले और इन्होंने रातो रात अपना हिसाब किताब ठीक कर लिया, इसतरह से जो आजाद थे वो मज़बूर है गुलाम बनने के लिए !! जय हिन्द जय भारत !!
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