शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

।। भ्रष्टाचार ।।

हम क्या कहें कहता है ये जमाना, भ्रष्ट नेताओं का लगा है जमावड़ा।
अरे भईया जरा हमें आज़माना जरा हमें आज़माना। 
कोई इधर उधर की बात हो तो पतली गलि के पिछले दरवाज़े से हमारे घर आना।
पार्टि के ओट में भ्रष्ट नेताओं के भोज में अपराधियों का है आना जाना।। 
अरे भईया जरा इनको आज़माना, जरा इनके सफेद पोस पर्दे तो हटाना।
इनको भी अहम है, जनता जनार्दन जरा इनको इनकी याद दिलाना।
हमें सुबह शाम है इनके कर्तव्यों को बताना, अरे भईया जरा मताधिकार दिखना।
देश का विकास, गरीब और गरीबि का नाश तो है नारा पर घनघोर घोटालों का है आना-जाना।।
अरे भईया जरा इनकी घनघोर घोटालों की काली घटा को हटाना।
दिलाना दिलाना जरा इनके वादों के जुमलो की याद दिलाना।।
छोटे मोटे गोल मटोल नेताओं की एक सभा को बुलाना फिर देखो इनके आभा को दिखाना।
गवाह है इसका गगन का अंनत आशियाना और ज़मीनी मंज़िल का ठिकाना जरा इनके मुख से मंत्री के मुखौटा को हटाना।।
जनता जनार्दन को बस जन गण मन गण का गित है गाना, रूखी सुखी खाना और गुदड़ी ओढ सो जाना।
हे भारतवासी वंदे मातरम तेरी कहानी, स्वराज है जिसकी निशानी ।।
हे भारतवासी अब-के राष्ट्र-धर्म को निभाना भ्रष्टाचार के विरूद्ध है तुझे मताधिकार के हथियार को चलाना।।
हम क्या कहें कहता है ये जमाना भ्रष्ट नीति से राजनीति में भ्रष्ट नेताओं का है आना जाना। 
राम संभालते है इनके काम ये संभाले सिर्फ दाम। 
रोजी रोटी का नाम नहीं और रोज़गार का इनको काम नहीं।। 
राजनीति इनका जन्मसिद्ध अधिकार, जिसमें व्यापार की चलती है इनकी दुकान। 
किसान इनके सियासी अखाड़े का पहलवान है और ये भ्रष्टाचार का बीज बोकर बगैर खेती के किसान हैं। 
मेरा प्राण प्रिय भारत महान।।

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) स्वराज

भगवान कृष्ण वासुदेव और देवकी के संतान थे। मथुरा के कारावास में उनका जन्म हुआ था और गोकुल में उनका लालन पालन हुआ था। यशोदा और नन्द उनके पालक माता पिता थे। ठीक वैसे ही हम भोजपुरीया भोजपुरी माँ के संतान हैं। हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है और हमारा लालन पालन हिन्दी माँ के आँचल में हुआ है। हिन्दी भाषा-भाषी और हिन्दी बोली से हमारे भोजपुरी भाषा (बोली) का कोई मतभेद नहीं है। लेकिन हिन्दी भाषा-भाषी को भोजपुरी भाषा के लोगो से मतभेद अवश्य है। हमें अपने भोजपुरी स्वराज के लिये एक आंदोलन की अत्यंत आवश्यकता है। आंदोलन में बलिदान, त्याग, तपस्या और स्वाभिमान की जरूरत है। उत्तर प्रदेश की राज भाषा हिन्दी और उर्दू है जबकि प्रदेश मे उर्दू अल्पसंख्यक है और भोजपुरी बहुसंख्यक इसके बावज़ूद भोजपुरी को अपने राज्य उत्तर प्रदेश में ही राज भाषा का दर्जा प्राप्त नहीं है ये एक विडम्बना ही नहीं बल्कि पूर्ण रूप से उपेक्षा है। भोजपुरी भाषा प्रमुख रूप में पश्चिमी बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उत्तरी झारखण्ड के क्षेत्रों में बोली जाती है। भाषा में बदलते वक़्त के साथ शब्द जुड़ते रहते हैं, वहीं कई बार कुछ शब्दों का प्रयोग बंद भी होने लगता है. भाषा में होनेवाले बदलावों को सहजता के साथ समझा जाना चाहिए। भाषा और बोली हर एक क्षेत्र में थोड़ी अलग होती है जो प्रमुख भाषा की उपभाषा अथवा उपबोली होती है। भोजपुरी वक्ताओं की संख्या लगभग १८ करोड़ है। इसके बावज़ूद भोजपुरी को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। शामिल न करने के लिए भारत सरकार तमाम तर्क कुतर्क प्रस्तुत करती है और हमारे खिलाफ साज़िश और षडयंत्र करके हमारे विकास और सुनहरे भविष्य मे बाधा उत्पन्न करके हमें विस्थापित और असंगठित करती रहती है। जिसका उद्देश्य केवल आर्थिक और राजनीतिक लाभ है।
भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) से विस्थापन के लिए मजबूर भोजपुरी भाषा भाषी अपने जीविका पार्जन के लिए देश के अन्य राज्य अथवा क्षेत्र में कठिन परिश्रम करने को मजबूर है और समय के अनुसार उनका शोषण, और बहिष्कार अन्य राज्यों के द्वारा किया जाता है। हम भोजपुरिया भाषा भाषी के लोगो को अपमानित भी किया जाता है जिसका उदाहरण अभी महाराष्ट्र और गुजरात का है जंहा से हमें बहुत अपमानित करके निकलने पर मजबूर किया गया और हम कुछ न कर पाए। जबकि हम जिस राज्य में अपने श्रम और परिश्रम का योगदान देते है उससे उसी राज्य का विकास होता है और मान सम्मान बढ़ता है। हमें तो सिर्फ और सिर्फ दो वक़्त की रोटी और कुछ धन ही प्राप्त होता है।
विस्थापन के दौरान कुछ भोजपुरिया जिस राज्य अथवा क्षेत्र में रहते है वो वहीं का होकर रह जाते और फिर अपनी मातृभाषा भोजपुरी को त्याग कर प्रवासी बन जाते है तथा उनकी अगली पीढ़ी भोजपुरी भाषा का परित्याग कर देती है फिर उनको भोजपुरी बोलने पढ़ने और लिखने में शर्म आती है। इस-प्रकार हम आज के भूमंडलीकरण के दौर में कह सकते है की हम बहु भाषी हो चुके है। जिसका कारण भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) में उचित रोज़गार और व्यापार का न होना है, हमारे पास साधन और संसाधन तो बहुत है लेकिन हम उसका उचित उपयोग नहीं कर पा रहे रहे। भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) में प्रमुख विश्वविद्यालय, महत्वपूर्ण सड़क, रेल और हवाई अड्डे है। लेकिन उसका उपयोग केवल बाहरी लोगो और पूंजीपति लोगो के द्वारा ही किया जाता है। कुछ गणमान्य व्यक्ति, राजनेता, अभिनेता, और व्यापारी जो भोजपुरिया है उन्होंने अच्छी शिक्षा, नौकरी, व्यापार और मान सम्मान पा लेने के बाद अपने अभिमान और लोभ के लिए अपने आप से किनारा कर लिया है अर्थात उनको समृद्धि की इतनी ज्यादा ललक हो गयी है की वो सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में ही अपना जीवन व्यतीत करते है। भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) से विस्थापित हो कर किसी अन्य समृद्ध और विकसित राज्य और शहर में अपना जीवन यापन कर रहे है। उदाहरण के तौर पर कई व्यक्ति विशेष है जिनका नाम नहीं लिखना चाहता हूं केवल संकेत ही काफी है।

राजनेता उत्तर प्रदेश से अपने धूर्त राजनीतिक लाभ के लिए जाति और धार्मिक समीकरण के आधार पर भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) को असंगठित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। पूर्वांचल क्षेत्र संगठित अपराध और भ्रष्टाचार के केंद्र रूप में अपमानित है। इसकी वजह आम जनता के लिए पर्याप्त शिक्षा और रोज़गार के अवसरों के अभाव है। भारत के किसी भी क्षेत्र के लोगों से अधिक शोषण ब्रिटिशों ने इस क्षेत्र के लोगों का किया क्योंकि इस क्षेत्र के लोगों मजबूत राष्ट्रवादी हैं और देश-भक्ति की भावना थी और ब्रिटिश राज के खिलाफ कड़ा विरोध किया।
भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) में प्रमुख विश्वविद्यालय, महत्वपूर्ण सड़क, रेल और हवाई अड्डे है जो उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है। 1991 में उत्तर प्रदेश की सरकार ने पूर्वांचल विकास निधि की स्थापना की जिसका उद्देश्य था क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं के लिये धन इकट्ठा करना जिससे भविष्य में संतुलित विकास के जरिए स्थानीय जरूरतों को पूरा करते हुए क्षेत्रीय असमानताओं का निवारण हो सके। लेकिन आजादी के 70 सालों बाद तक भी नहीं हो सका। सिर्फ पूर्वांचल के पिछड़ेपन के नाम पर वोटों की सियासत की जा रही है। हर चुनाव में विकास की बातें की जाती है मगर वोट लेने के बाद सभी राजनीतिक दल पूर्वांचल की बदहाली को भुला देते हैं। यही वजह है कि अब अलग राज्य की मांग तेजी से उठने लगी है। यूपी के 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा अलग राज्य बनाने की मांग कर रहा है। ये मांग पुरी तब होगी जब अन्य तिन राज्य पश्चिमी बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उत्तरी झारखण्ड के क्षेत्रों की जनता आंदोलन का आरम्भ करें तथा इन तिन राज्यों की सरकारों को विवश किया जाये भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) के गठन के लिये। अब तक कई जनपदों में जन अधिकार यात्राएं भी निकल चुका है। यत्रा से भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) का स्वराज सिद्ध नहीं होगा इसके लिये एक आंदोलन की आवश्यकता है, जिसमें त्याग, तपस्या और बलिदान तथा स्वाभिमान की जरूरत है। जैसे उदाहरण के लिये आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड का इतिहास गवाह है की किस प्रकार के संघर्ष से इन राज्यों का गठन हुआ और पूर्ण स्वराज स्थापित हुआ। इन राज्यों के गठन के बाद हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान का समग्र विकास निरंतर जारी है। तो फिर भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) के निर्माण और गठन के बाद भारतवर्ष का विकास दिन दुना और रात चौगुना होना निश्चित है।  भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) के निर्माण और गठन के लिये एक बार फिर पूर्ण स्वराज का आंदोलन प्रारम्भ करना होगा जिसका आरम्भ मैं कलम का फकीर बन कर चंद लकीरो के शब्दों से कर चुका हूं।। मैं इस प्रस्तुत लेख को भोजपुरी भाषा में भी लिख सकता था मगर भोजपुरी में लिखने के बाद इसको पढने और समझने वाले शायद भोजपुरी भाषा और बोली के लोग ही होते, जबकि मुझे भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) के स्वराज के लिये संपूर्ण भारत-वर्ष के जनमानस के चेतना को जागृत करने के लिये अपने पालन करता हिन्दी मां का उचित उपयोग ही उपयोगी और सिद्ध लगा। भोजपुरीया को प्रणाम और हिन्दी को नमस्कार। संस्कार ही भाषा का दुसरा रूप है।। प्रस्तुत लेख में बदलाव संभव है कृप्या सुझाव और सहयोग प्रदान करें।। जय हिंद जय भारत ।।

शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

।। किसान की कहानी।।

किसान की कहानी, मिट्टी है उसका बचपन, फसल उसकी जवानी।
कर्ज उसका बुढापा, सरकार उसकी लाचारी।।
किसान की कहानी, पसीना उसका मिट्टी का खून-पानी , अन्न अमृत का पानि।
किसान की कहानी, दाल भात खाना गुदड़ी ओढ सो जाना।
लाचारी का मातम, मौसम की मेहरबानी।।
किसान की कहानी, भारतवर्ष का आन-बान, मान-सम्मान है किसान।
सरकार खरपतवार किसान महान।।
सियासी अखाड़े का पहलवान है किसान।
मेरे घर के मंदिर का भगवान है किसान।।
किसान की कहानी, हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई, हिन्दुस्तान है किसान।
आज धरती माँ के आँचल में बेबस और लाचार है किसान।।
जय जवान जय किसान।।

शनिवार, 17 नवंबर 2018

मैं और मेरा वक्त

एहसान होगा तेरा ए वक्त अगर, मुझे मेरे वक्त से मिला दे ।
वक्त ने कहा तू बडा भोला है।
मैने कहा तू बडा बडबोला है।।
जब दुनिया न थी तब भी तू था,
मगर इतना बता तू क्या माँ से,
पहले आया।
वक्त थोडा घबड़ाया, और कहने
लगा दुनिया में सबकुछ मैने बनाया।
मैने कहा, मैं भोला-भाला ही सही
मुझे मेरी माँ ने तुझ जैसा रंग बदलना न सिखाया।
शुक्रिया मेरे वक्त, तू मिले या न मिले,
पर मेरी माँ ने वक्त पर मेरा,
वक्त बताया।
वक्त थोडा ठहरा, और कहने लगा
एहसान होगा मुझ पर तेरा अगर,
तू मुझे माँ से मिला दे ।।
मैने वक्त से कहा, तू मेरा हर एक वक्त मेरी माँ का बना दे ।।

पेपर लीक का असली जिम्मेदार कौन?, शिक्षा व्यवस्था या सिस्टम?

भारतीय शिक्षा व्यवस्था: बदलाव, चुनौतियां और सुधार की आवश्यकता भारत की शिक्षा व्यवस्था में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं और आगे भी होत रहने च...