हम क्या कहें कहता है ये जमाना, भ्रष्ट नेताओं का लगा है जमावड़ा।
अरे भईया जरा हमें आज़माना जरा हमें आज़माना।
कोई इधर उधर की बात हो तो पतली गलि के पिछले दरवाज़े से हमारे घर आना।
पार्टि के ओट में भ्रष्ट नेताओं के भोज में अपराधियों का है आना जाना।।
अरे भईया जरा इनको आज़माना, जरा इनके सफेद पोस पर्दे तो हटाना।
कोई इधर उधर की बात हो तो पतली गलि के पिछले दरवाज़े से हमारे घर आना।
पार्टि के ओट में भ्रष्ट नेताओं के भोज में अपराधियों का है आना जाना।।
अरे भईया जरा इनको आज़माना, जरा इनके सफेद पोस पर्दे तो हटाना।
इनको भी अहम है, जनता जनार्दन जरा इनको इनकी याद दिलाना।
हमें सुबह शाम है इनके कर्तव्यों को बताना, अरे भईया जरा मताधिकार दिखना।
देश का विकास, गरीब और गरीबि का नाश तो है नारा पर घनघोर घोटालों का है आना-जाना।।
अरे भईया जरा इनकी घनघोर घोटालों की काली घटा को हटाना।
दिलाना दिलाना जरा इनके वादों के जुमलो की याद दिलाना।।
छोटे मोटे गोल मटोल नेताओं की एक सभा को बुलाना फिर देखो इनके आभा को दिखाना।
गवाह है इसका गगन का अंनत आशियाना और ज़मीनी मंज़िल का ठिकाना जरा इनके मुख से मंत्री के मुखौटा को हटाना।।
जनता जनार्दन को बस जन गण मन गण का गित है गाना, रूखी सुखी खाना और गुदड़ी ओढ सो जाना।
हे भारतवासी वंदे मातरम तेरी कहानी, स्वराज है जिसकी निशानी ।।
हे भारतवासी अब-के राष्ट्र-धर्म को निभाना भ्रष्टाचार के विरूद्ध है तुझे मताधिकार के हथियार को चलाना।।
हम क्या कहें कहता है ये जमाना भ्रष्ट नीति से राजनीति में भ्रष्ट नेताओं का है आना जाना।
राम संभालते है इनके काम ये संभाले सिर्फ दाम।
रोजी रोटी का नाम नहीं और रोज़गार का इनको काम नहीं।।
राजनीति इनका जन्मसिद्ध अधिकार, जिसमें व्यापार की चलती है इनकी दुकान।
किसान इनके सियासी अखाड़े का पहलवान है और ये भ्रष्टाचार का बीज बोकर बगैर खेती के किसान हैं।
मेरा प्राण प्रिय भारत महान।।
राम संभालते है इनके काम ये संभाले सिर्फ दाम।
रोजी रोटी का नाम नहीं और रोज़गार का इनको काम नहीं।।
राजनीति इनका जन्मसिद्ध अधिकार, जिसमें व्यापार की चलती है इनकी दुकान।
किसान इनके सियासी अखाड़े का पहलवान है और ये भ्रष्टाचार का बीज बोकर बगैर खेती के किसान हैं।
मेरा प्राण प्रिय भारत महान।।