शनिवार, 16 मार्च 2024

आत्मकामी व्यक्तित्व विकार, आत्ममुग्धता

  आत्मकामी व्यक्तित्व विकार

 

ऐसा व्यक्ति जो स्वयं में अत्यधिक रुचि या प्रशंसा रखता हो।

एक व्यक्तित्व विकार जिसमें आत्म-महत्व की अतिरंजित भावना, प्रशंसा की आवश्यकता और अन्य लोगों के लिए सहानुभूति की कमी होती है।

कम से कम एक व्यक्ति ऐसा है जो हर कार्य क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है। वह हमेशा सभी चीजों का श्रेय लेने की इच्छा रखता है। वह अपने बारे में बहुत बातें करता है और अपने सहकर्मियों को हेय दृष्टि से देखता है।

ऐसा व्यक्ति खुद को बहुत खास समझता है और अगर दूसरे लोग उसका सम्मान नहीं करते तो वह परेशान हो जाता है मनोवैज्ञानिक ऐसे आत्ममुग्ध व्यक्ति को 'नार्सिसिस्ट' कहते हैं।

ऐसे आत्ममुग्ध राजनेता राजनीति में मौजूद हैं। यदि समय रहते इनकी पहचान कर ली जाए तो तानाशाही से बचा जा सकता है। इस प्रकार के आत्ममुग्ध लोग कार्यस्थल पर भी पाए जाते है, यदि समय रहते इनकी पहचान कर ली जाए तो अनावश्यक तनाव से बचा जा सकता है।

नार्सिसिस्ट' शब्द ग्रीक पौराणिक चरित्र नार्सिसस से लिया गया है, जो पानी में अपने स्वयं के प्रतिबिंब से मोहित हो गया था।

आत्ममुग्धता एक विकार है, लेकिन कई प्रसिद्ध लोग ऐसे ही रहे हैं।

मेरा मानना है कि “ऐसे गुण अक्सर उन नेताओं में पाए जाते हैं जो चुनौतियों का सामना करते हैं और बदलाव लाते हैं।” दुनिया के कई सबसे करिश्माई राष्ट्रपति अहंकारी रहे हैं।

“लेकिन आज चाटुकारिता और चापलूसी का युग है।

इस तरह देखा जाए तो दुनिया के कई आत्ममुग्ध राष्ट्रपति तानाशाहों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। इस दुनिया में हम चीन, रूस और कोरिया जैसे देशों के बीच हैं। अब कलम की ताकत निर्भर करती है।” आप यह किसके लिए लिख रहे हैं? एक तानाशाह, आत्ममुग्ध या तानाशाही के ख़िलाफ़। आप बुद्धिमान और बुद्धिजीवी लोग हैं, लेखक होने के साथ-साथ मैं पारिवारिक जिम्मेदारियों से भी बंधा हूं। लेकिन, मैं अपने देश में मुफ्त योजनाओं पर निर्भर नहीं हूं। और मैं चापलूस नहीं हूं. शायद इसीलिए मैं अभी भी हालात से जूझ रहा हूं।


मैं यह घोषित नहीं कर सकता कि मेरे देश में या अन्य देशों में कौन सा प्रसिद्ध व्यक्ति आत्ममुग्धता की बीमारी से विशेष रूप से प्रभावित है। क्योंकि अराजकता के कारण कई बुद्धिजीवियों और ईमानदार लोगों को इन मनोरोगी आत्ममुग्ध लोगों ने मार डाला है।

हालांकि डींगें हांकने वालों से सहमत होना मुश्किल हो सकता है, लेकिन शोध एक अलग कहानी बताता है। अहंकारी लोग अपने करियर में अच्छी प्रगति करते हैं और संगठन के लिए भी उपयोगी होते हैं। सवाल यह है कि कैसे? नार्सिसिस्ट आसानी से हार नहीं मानते। असफलता के बावजूद वे प्रयास करते रहते हैं। झूठ बोलते हैं, बातें बनाते हैं, लेकिन लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकाते।

डींगें हांकने में जुमले बाज़ी में इनको वाकपटुता में महारत हासिल होता है, इनके द्वारा हांकें गये जुमले को झूठे वादों  को हम आसानी से सच मान लेते है। साधारण व्यक्तित्व के सामान्य व्यक्ति द्वारा इनको गलत या झूठा साबित नहीं किया जा सकता है। 

मनोवैज्ञानिक डॉक्टरों के अध्ययन के अनुसार अहंकारी लोगों में कई गुण होते हैं जो उन्हें बॉस के पद तक ले जाते हैं। “वे करिश्माई बनना चाहते हैं और तानाशाह भी।

ये कठिन परिस्थितियों में भी नेतृत्व करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे जोखिम उठाते हैं। "किसी संगठन को कठिन समय में आगे ले जाने के लिए ये गुण आवश्यक हैं।"

सवाल ये है कि, ''क्या खुद से मुग्ध होने का गुण जन्मजात होता है या ये समय के साथ विकसित होता है? मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि दोनों चीजें हो सकती हैं।

कुछ लोगों में आत्ममुग्धता का गुण जन्म से ही मौजूद होता है, जबकि अन्य में यह उनकी परवरिश, उनकी वित्तीय स्थिति और उनके कार्यस्थल की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

आत्ममुग्धता के विकार का शिकार अधिकतर वही व्यक्ति होता है जो धोखाधड़ी, चापलूसी और गुंडागर्दी के जरिए अचानक अपनी हैसियत से ज्यादा सम्मान और समृद्धि हासिल कर लेता है। 

दि मशहूर डोली चाय बेचने या बनाने वाला व्यापारी अथवा राजनेता बन जाता है तो हो सकता है कि वह आत्ममुग्ध से पीड़ित मनोरोगी हो जाये।

इस प्रकार के व्यक्तित्व विकार को केवल क्रांति और जन आंदोलन द्वारा ही ठीक किया जा सकता है। या फिर सामान्यतः मनोविज्ञान द्वारा।

एक जाने-माने भारतीय राजनेता द्वारा एक पुरस्कार समारोह में कहा गया था कि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में सामग्री प्रकाशित की जा सकती है। इस तरह मैंने उसकी इच्छा पूरी की। समान्य व्यक्तित्व के आत्ममुग्ध से पीड़ित मनोरोगी का इलाज मनोवैज्ञानिक के द्वारा सम्भव है। परन्तु अति आत्ममुग्ध और आत्मकामी व्यक्तित्व विकार केवल जन जागरुकता के द्वारा ही संभव है।

मैं इसे बहुत अच्छे से समझा सकता हूं, लेकिन एक मनोवैज्ञानिक इसे मुझसे बेहतर समझा सकता है। लेकिन निश्चित रूप से इसे जनक्रांति आंदोलन की वीटो शक्ति से ही हल और दुरुस्त किया जा सकता है। मुझे आश्चर्य है 🤔 क्या होगा यदि आत्मकामी व्यक्तित्व विकार से पीड़ित कोई व्यक्ति मेरे ब्लॉग के माध्यम से इसे स्वीकार कर ले। कि वह मानसिक रूप में बिमारी है। फिर हो सकता है कि मुझे वह आत्ममुग्ध से पीड़ित मनोरोगी मरे साधारण व्यक्तित्व को आघात करें, मुझे परेशान करे। मैं अपनी शांति और समृद्धि को लेकर थोड़ा आशंकित हूं। मुझे अपनी कृपा देने के लिए धन्यवाद।


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