रविवार, 5 अक्टूबर 2014

सैनिक की अन्तः पुकार

साथी घर जाकर मत कहना संकेतो से बतला देना।।
यदि हाल मेरी माता पूछे, मुरझाया फुल दिखला देना।।
भारत के नारी की गाथा सुना देना।।
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे, इक जलता दिप बुझा देना।।
यदि इतने पर भी न समझे, तो माँग का सिन्दूर मिटा देना।।
साथी घर जाकर मत कहना संकेतो से बतला देना।।
यदि माता मेरी क्रंदन करे, पकड कर उन्हे समझा देना।।
यदि इतने पर भी न समझे, तो भारत के वीरों की गाथा सुना देना।।
यदि हाल मेरा मित्र पुछे तो देश की याद दिला देना।।
यदि संतान रोए तो, हे वीरों अपने सीने से लगा लेना।।
साथी घर जाकर मत कहना संकेतो से बतला देना।
यदि देश का वीर बालक हो अधीर, तो उसे वीरों के बलिदान की गाथा सुना देना।।
यदि मेरी मातृभूमी हो कभी वीर विहीन, तो भारत के वीर माता को जगा देना।।
साथी घर जाकर मत कहना संकेतो से बतला देना।।
यदि मिले जो कभी कहीं कोई देशद्रोही, सैनिक की अन्तः पुकार सुना देना।।
मै तो ठहरा कलम का फकीर, मेरे मृत्यु पर कलम के चन्द लकीरों से भारत माता की जय लिख कर दिखला देना।।
भारत माता के जय हो का उदघोष विश्व को सुना देना।।
साथी घर जाकर मत कहना संकेतो से बतला देना ।।


(एक अधूरी कविता जिसे पूरा करने का अधूरा प्रयास)

1 टिप्पणी:

Deepak Dang ने कहा…

Ek deshbhakt hi in ka dard mehsoos kar sakta hai. hammen se har ek agar desh bhakt ho to har safai ek din mein ho sakti hai. Gundey kabhi taqat se raz nahin karte apne dar se karte hain. agar har sharif sipahi ki tarah jo haath mein ho uttha le to bomb/ guns wale pichhe hat jate hein. APMAANIT HO BAAR-2 MARNA EK BAAR MARNA SHADATHAI HAI AUR BHAGWAN KI POOJA YA KUDDA KI IBBADDAT HAI.

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