शुक्रवार, 15 नवंबर 2024

।।विश्वगुरु।।

डूब गया हिन्द महंगाई के महासागर में,

ले रही अंगड़ाई जवानी बेरोजगारी भत्ता के धरातल पर।।


गांधी ने स्वराज लिखा,

शहिदे आज़म ने इन्कलाब लिखा,

बाबा साहेब ने संविधान

संतों ने सनातन किताब लिखा,

परमात्मा ने विधी का कैसा 

ये विधान लिखा।।


वर्तमान में नौजवान पूंजीवादी व्यवस्था का आर्थिक गुलाम दिखा,

सरजमीं पर सैनिक मेहरबान मिला खेतों में भुखा किसान दिखा।।


देश के अंधभक्तो को चौकिदार 

प्रधान मिला अपने फकिरी से

परेशान दिखा।।


मुफ्तखोरी मे जनता जनार्दन पहलवान मिला,

पढ़ा लिखा अनपढ़ राजनेता विद्वान मिला, 

अभिनेता पात्रता से भगवान दिखा 

हे प्रभु इस दौर का कैसा ये इतिहास लिखा।।


बहरा सुनें अंधा देखे गूंगा बोले

ऐसा क्यों वर्तमान दिखा,

जैसे प्रांतों में बिखरा विभिन्न भाषाओं में जकड़ा धर्म के 

बंधन में बंधा हिन्दुस्तान मिला।।


सपनों में उपस्थित मंदिर मस्जिद 

गिरजाघर गुरूद्वारा खुशहाल मिला।।

हे प्रभु अति रीति का अंत निश्चित 

अंतिम अब प्रमाण दिखा,

विश्वगुरु है भारत ऐसा कोई चमत्कार दिखा‌।‌।


कलम के कानून से जज मुझे हैरान दिखा,

पत्र पढ़ पत्रकारिता का पत्रकार

मुझे अज्ञान मिला।।


हे प्रभु मैं ठहरा क़लम का फकीर 

क्षात्र मुझे समझदार मिला,

शिक्षक आंदोलन से परेशान दिखा,

हे प्रभु इस दौर का ऐसा क्यों विधान लिखा।।

कोई टिप्पणी नहीं:

पेपर लीक का असली जिम्मेदार कौन?, शिक्षा व्यवस्था या सिस्टम?

भारतीय शिक्षा व्यवस्था: बदलाव, चुनौतियां और सुधार की आवश्यकता भारत की शिक्षा व्यवस्था में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं और आगे भी होत रहने च...