नमस्कार दोस्तों, विभिन्न समाचारपत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में भारतीय पर्यटकों पर हुए हमले के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ने फ़ोन करके भारत और पाकिस्तान से तनाव कम करने की अपील की है। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में बढ़े तनाव और टकराव की आशंका के बीच दुनिया के कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है। 22 अप्रेल 2025 को जम्मू-कश्मीर के बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हुए हमले में एक स्थानीय कश्मीरी समेत 26 लोगों की मौत हुई थी।
भारत ने इस हमले के बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाने की घोषणा की है। इस हमले के बाद दिए पहले सार्वजनिक बयान में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 'दोषियों को सख़्त सज़ा दी जाएगी।
भारत ने दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि को निलंबित करने, बॉर्डर क्रासिंग बंद करने और पाकिस्तानी नागरिकों के वीज़ा रद्द करने समेत कई फैसले लिए।
वहीं जवाब में पाकिस्तान ने 1972 के शिमला समझौते से बाहर आने का एलान किया है और कहा कि नदियों के पानी रोकने या मोड़ने का कोई भी प्रयास 'जंग की कार्रवाई' मानी जाएगी और इसका पूरी ताक़त से जवाब दिया जाएगा।
दोनों ही देशों के राजनीतिक नेतृत्व की ओर से एक दूसरे को कड़ी चेतावनी और मुंहतोड़ जवाबी कार्रवाई करने वाले तीखे बयान दिए जा रहे हैं।
पहलगाम हमले के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से भारत के प्रधानमंत्री ने बीते गुरुवार को एक रैली में कहा था कि 'हमला करने वाले आतंकियों को कल्पना से भी बड़ी सज़ा मिलेगी।
उन्होंने कहा, "मैं पूरा दुनिया को ये संदेश देता हूं कि भारत हर आतंकी को पहचानकर, खोजकर सज़ा देगा और उन्हें समर्थन देने वालों को भी... अब आतंकियों की बची ज़मीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।
विभिन्न समाचारपत्रों के साक्षात्कार के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब देने की बात कही है, और कहा कि 'सिंधु जल संधि से जुड़ी किसी भी कार्रवाई को जंग का एलान माना जाएगा और हम किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।
उनका इशारा पुलवामा आंतकवादी हमले के बाद भारत की ओर से बालाकोट में हवाई हमले की ओर था जब दोनों देशों की वायु सेनाओं में सीमित झड़प हुई थी।
दक्षिण एशिया की राजनीति पर नज़र रखने वाले जानकार भारत की ओर से किसी सीमित सैन्य कार्रवाई की आशंका से इनकार नहीं कर रहे जिसमें एक व्यापक जंग छिड़ने का ख़तरा है, और साथ ही जल्दबाज़ी में सैन्य कार्रवाई का फ़ैसला लेने से आगाह किया है। क्योंकि कि भारत और पाकिस्तान परमाणु हथियार संपन्न देश है, और भारतीय सेना के सीमित सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए पाकिस्तान पर्याप्त प्रयास कर सकता है।
विभिन्न समाचारपत्रों में प्रकाशित सैन्य क्षमता आंकलन के अनुसार 2025 में सैन्य स्ट्रेंथ रैंकिंग में भारत और पाकिस्तान के बीच आठ पायदान का फ़ासला है।
साल 2025 में वैश्विक सैन्य ताक़त के मामले में 145 देशों में भारत की रैंकिंग चौथी जबकि पाकिस्तान की रैंकिंग 12वीं है।
भारतीय सेना के पास क़रीब 22 लाख आर्मी जवान, 4,201 टैंक, क़रीब डेढ़ लाख बख़्तरबंद वाहन, 100 सेल्फ़ प्रोपेल्ड आर्टिलरी और 3,975 खींच कर ले जाने वाली आर्टिलरी है. इसके अलावा मल्टी बैरल रॉकेट आर्टिलरी की संख्या 264 है।
भारतीय एयरफ़ोर्स के पास 3 लाख 10 हज़ार वायु सैनिक और कुल 2,229 विमान हैं जिनमें 513 लड़ाकू विमान और 270 ट्रांसपोर्ट विमान हैं. कुल विमानों में 130 हमला करने वाले, 351 ट्रेनर और छह टैंकर फ़्लीट के विमान हैं।
भारतीय सेना के तीनों अंगों के पास कुल हेलीकॉप्टरों की संख्या 899 है जिनमें 80 अटैक हेलीकॉप्टर हैं।
भारतीय नेवी के पास 1.42 लाख नौसैनिक, कुल 293 पोत हैं जिनमें दो विमानवाहक पोत, 13 डिस्ट्रॉयर, 14 फ़िगेट्स, 18 सबमरीन और 18 कॉर्वेट्स युद्ध पोत हैं।
लॉजिस्टिक्स के तौर पर भारतीय सेना के पास 311 एयरपोर्ट्स, 56 बंदरगाह और 63 लाख किलोमीटर की सड़क और 65 हज़ार किलोमीटर की रेलवे कवरेज है। जबकि पाकिस्तानी सैन्य क्षमता के आंकलन के अनुसार पाकिस्तानी सेना के पास क़रीब 13.11 लाख आर्मी जवान, 1.24 लाख नौसैनिक और 78 हज़ार वायु सैनिक हैं।
पाकिस्तान के पास कुल 1,399 विमान हैं जिनमें 328 लड़ाकू विमान, 90 अटैक टाइप, 64 ट्रांसपोर्ट विमान, 565 ट्रेनर, 4 टैंकर फ़्लीट और 373 हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें 57 अटैक हेलीकॉप्टर हैं।
इसके पास 2,627 टैंक, 17.5 वाहन, 662 सेल्फ़ प्रोपेल्ड आर्टिलरी, 2629 खींच कर ले जाने वाली आर्टिलरी और 600 मल्टीबैरल रॉकेट आर्टिलरी है।
पाकिस्तानी नेवी के पास कुल 121 युद्ध पोत हैं, जिनमें 9 फ्रिगेट्स, 9 कॉर्वेट्स, आठ सबमरीन और 69 पेट्रोल वेसेल्स हैं।
लॉजिस्टिक्स के रूप में इसके पास सिर्फ़ तीन बंदरगाह, 116 एयरपोर्ट 60 मर्चेंट मैरीन फ़्लीट हैं. इसके अलावा 2 लाख 64 हज़ार किलोमीटर सड़क और 11.9 हज़ार किलोमीटर रेलवे कवरेज है।
स्वीडन के थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपरी) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास 172 जबकि पाकिस्तान के पास 170 परमाणु वॉरहेड हैं।
हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के पास कितने परमाणु वॉरहेड तैनात हैं।
इस प्रकार पाकिस्तान भारत का मुक़ाबला करने के लिए हर संभव तैयारी कर रहा है, जबकि भारत का ध्यान लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों की तैनाती पर केंद्रित है. यानी ऐसे हथियार जो चीन को भी निशाना बना सकते हैं।
भारत और पाकिस्तान के पड़ोसी और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी परमाणु शक्ति चीन के पास परमाणु हथियारों की संख्या 22 फ़ीसदी इज़ाफ़े के साथ 410 वॉरहेड से बढ़कर 500 हो गई है।
पिछले साल नवंबर में प्रकाशित समाचारपत्रों में लेख के मुताबिक़, भारत और पाकिस्तान अपनी ड्रोन्स की संख्या में तेज़ी से वृद्धि कर रहे हैं।
रक्षा मामलों के विश्लेषकों के अनुसार, भारत के पास अगले दो से चार सालों में लगभग पांच हज़ार ड्रोन्स होंगे। उनके अनुसार पाकिस्तान के पास 'भारत से कम ड्रोन्स' हैं।
पिछले साल अक्तूबर में भारत ने अमेरिका से साढ़े तीन अरब डॉलर मूल्य के 31 प्रीडेटर ड्रोन्स ख़रीदने का समझौता किया था। प्रीडेटर ड्रोन्स दुनिया के सबसे कामयाब और ख़तरनाक ड्रोन माने जाते हैं।
पहलगाम हमले से बदल गए हैं हालात, भारत ने हाल के सालों में कश्मीर के हालात सामान्य होने पर ज़ोर दिया है जिसके, परिणामस्वरूप वहां पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिससे कश्मीरी युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। इसके साथ ही कश्मीर की जनता खुशहाली एवं भाईचारे से अपने भारत देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में अपना महत्व्पूर्ण सार्थक योगदान दे रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बिच हालात बिगड़ गया है, और नियम कानून बदलते हुए नजर आ रहे हैं।
परन्तु भारत देश में अहिंसा, सत्य और धार्मिक सद्भावना के साथ आपसी सोहार्द एवं भाईचारा है, जिससे की मुल्क में अमन-चैन कायम है।
आंतकी संगठनों द्वारा हमारे देश में हिंसा और अशांति फैलाने का निरर्थक प्रयास कभी सफल नहीं हो सकता है, भारत के देशवासियों के हिम्मत और ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है, आंतक के आकाओं को मिट्टी में मिलाना है।
शायद हमें अंतर्राष्ट्रीय नैतिकताओं की बाध्यता, के साथ ही अमेरिका और चीन जैसे देशों के कुटनीतिज्ञ षड्यंत्र की आशंकाएं हैं। नहीं तो आंतकी संगठनों के मुखिया पाकिस्तान को सबक सिखाना कोई बड़ी बात नहीं है, हम पहले भी कई बार इनको घुटनों पर ला चुके हैं, लेकिन इस बार युद्ध के बाद शायद ये अपने पैरों तले जमीन पर खड़ा नहीं हो सकता है।
द्वंद्व कहां तक पाला जाए,
युद्ध कहां तक टाला जाए।
तू भी है राणा का वंशज,
फेंक जहां तक भाला जाए।
इस बिगड़ैल पड़ोसी को तो,
फिर शीशे में ढाला जाए।
दोनों ओर लिखा हो भारत,
सिक्का वही उछाला जाए...
प्रस्तुत लेख में प्रकाशित विवरण एवं समिक्षा, विभिन्न समाचारपत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ही बताया गया है। कृपया तथ्यों और सूचनाओं से संबंधित विषयों पर किसी भी प्रकार के सुझाव एवं बदलाव के लिए हमें सुचित करें। ब्लॉग पेज को सबस्क्राइब, लाइक और शेयर जरुर करें।
#जय हिन्द #जय भारत


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