शनिवार, 21 सितंबर 2024

हो ना हो

कामयाब होने के कम,
नाकामयाबी के चर्चे ज्यादा है।।
सितारों से सजी चांदनी के,
हिस्से में अंधेरी रात है।।

चांद की चांदनी से साजिश में,
फिर क्यों बहाना बरसात का।।

फिर ये रात हो ना हो,
मुकद्दर से मिलने की बात,
हो ना हो, खुदा से इल्तिज़ा है,
अंधेरे में चांदनी बरसात हो।।

चमकते चांद की साज़िश,
नाकामयाब हो, 
रोशनी में क्या बात हो,
शायद अंधेरे में फिर मुलाकात हो।।

मेरे तनहाईयों की बात हो ना हो,
सिर्फ तुम्हारे शहनाईयों की बात हो।।

वक्त की कैद से चंद लम्हे,
उधार लाया हूं, 
नसीब से फिर मिलेंगे, 
मुकद्दर में शायद ये बात,
हो ना हो।।

जिंदगी एक सफर है,
मंजिल तक साथ तेरे,
सांसें हमारी कामयाब हो ना हो।।

हो सकता हूं साज़िश का शिकार,
पर मां की दुआएं, बाप का हौसला देख,
हादसे कामयाब हो ना हो।।

दोस्तों दोस्ती के इम्तिहान में,
जिंदगी के पर्चे ज्यादा है,
मेरे हिस्से में मेरा चांद आधा,
मेरी नाकामयाबी के चर्चे ज्यादा है।।

लम्हों की कैद में जिंदगी है,
मगर क्या फर्क पड़ता है कभी,
मां की दुआं बाप के हौसले में,
वक्त पे हम कामयाब हो ना हो।।

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