शनिवार, 30 मार्च 2019

।। सावधान मतदाता ।।

मतदाता चार प्रकार के होते हैं। पहले दैनिक मजदूरी करने वाला व्यक्ति है, जैसे कि दुकानदार और निचले दर्जे के कर्मचारी, जैसे कि मैं और चौकीदार आदि। दूसरा व्यक्ति मध्यम वर्ग का है, जैसे कि प्रबंधक, क्लर्क और उच्च श्रेणी के कर्मचारी आदि। तीसरा उच्च वर्ग है, जैसे कि छोटे-बड़े व्यापारी, कलाकार, साहित्यकार, पत्रकार और दलाल। चौथा धर्मनिरपेक्ष और जातिवादी प्रकार के है, जैसे कि वरिष्ठ नागरिक, किसान और सेवानिवृत्त व्यक्ति आदि। पहले और चौथे प्रकार के मतदाताओं की मतदान में महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि वे राजनीति पसंद करते हैं और इस प्रकार के मतदाता अधिक संख्या में होते हैं। ये मतदाता केवल राजनेता की प्रतिबद्धता के बारे में देख रहे होते हैं और नेताओं के प्रलोभन के झांसे मे आसानी से फँस जाते है।
लेकिन, दूसरे और तीसरे प्रकार के मतदाताओं को यह गंदी राजनीति पसंद नहीं है और वे केवल दान और मतदान द्वारा राजनीति को स्थिर करना चाहते हैं। इस प्रकार राजनीति में मतदाताओं और मतदान के बारे में विशाल दृष्टिकोण और अवसर हैं। कृपया प्रलोभन में न आकर सही नेता और पार्टी (दल) का चुनाव करें। अब बात करते हैं नेता और पार्टी की, पार्टी तीन प्रकार की है, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और निजी स्तर की, जिसमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की पार्टियों में नेताओं का स्तर भी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय रूप में होता है। क्षेत्रीय स्तर के नेता अपनी प्रतिबद्धता और समाज सेवा के द्वारा अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करते हैं। कुछ निजी दल के स्वतंत्र नेता है जिनका कार्य समर्थन और अ-समर्थन के द्वारा राजनीति को स्थिर करना होता है।
अंततः निष्कर्ष यह निकलता है कि पहले और चौथे प्रकार के मतदाताओं का रुझान, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल तथा नेताओं की और अधिक होता है क्योंकि इनके द्वारा मतदाताओं को अत्यधिक प्रलोभन और झांसा प्रदान किया जाता है। नेताओं का दृष्टिकोण समाज सेवा और राष्ट्र सेवा की ओर होना चाहिए, मगर आज के भूमंडलीकरण के दौर में नेता निजी स्वार्थ और विश्व में अपनी पहचान स्थापित करने और सत्ता में अपने आप को उच्च पद पर स्थापित करने के लिए राजनीति का व्यापार कर रहे हैं। ऐसे नेताओं के लिए समाज सेवा और राष्ट्र सेवा का कोई मतलब नहीं होता है। ये सिर्फ अपने और अपनी पार्टी (दल) की सेवा और विकास मे लगे रहते है। इस प्रकार के नेताओं से और पार्टियों से मतदाताओं को बच कर रहना आवश्यक है। सावधान मतदाता लोभ और झांसे में न आकर उनका ही चुनाव करें जो सच के कसौटी पर खरा हो। सोने का निर्माण सैकडों वर्षो के प्रक्रीया के उपरांत होता है। और सोने के सौ टुकड़े करने से उसका मूल्य कम नहीं होता है। इसी प्रकार से जो सैकडों वर्षो से राजनीति में स्थापित है, जो सच न बोले लेकिन झूठ बोल कर लोभ और झांसा न दे, जिनका जीवन दर जीवन समाज सेवा और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित हो जिन्होंने बलिदान त्याग और सच का राह चुना है आप उसी का चुनाव करें। हमें शिक्षित और सम्मानित नेतृत्व की जरूरत है। आज के समय में सच्चे का मुहँ काला और झूठे का बोल बाला है। हम भारतवासी सदैव विश्व में सत्य, त्याग और तपस्या के लिए उदाहरण हैं। हमारा इतिहास सनातन और स्वर्णिम है। जय हिंद जय भारत।

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