मंगलवार, 12 जनवरी 2021

।। नेता जी क्या कहना ।।

जनता जनार्दन को सच और झूठ के पर्दे में रखकर सत्ता के प्रस्‍तुतकर्ता, संयोजक, निर्देशक और मेज़बान पर्दे बदलने में माहिर है। सत्ता के संगठनात्मक संरचना के प्रधान संगठन के संपादक संप्रभुता और सत्ता के मद (घमंड) में चूर है वो सिर्फ अपने मन की बात करते हैं जनता के मन की बात तथा जनता की मेजबानी करने वाले सांसद और विधायक आदि, प्रधान संपादक के प्रवचन के अनुसार ही बात करते हैं। जनता को अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए आंदोलन, अनशन, न्यायलय और हड़ताल के माध्यम से बातचीत करनी पड़ती है। फिर विद्रोह, देशद्रोह और आरजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। राजनीति के विज्ञान में विभिन्न प्रकार से परीक्षण, निरीक्षण और आविष्कारों का नकारात्मक प्रभाव देश, समाज, अर्थ, धर्म और संस्कृति को प्रभावित करता है जिसका परिणाम आंदोलन, अनशन और हड़ताल है। बाकी क्या कहना। बस इतना ही कहना है कि जनता को सच और झूठ के पर्दे से बाहर निकलना है। जनता अपने प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व स्वयं करें। जैसे किसान फसल का सैनिक सरहद का शिक्षक शिक्षा का न्यायलय न्याय को सम्मान देते हुए सुरक्षित रखता है ठीक वैसे ही संविधान का सम्मान संसद को रखना होगा। संविधान की सुरक्षा राजनीति विज्ञान के नकारात्मक परीक्षण, निरीक्षण और आविष्कारों से नहीं होगा बल्कि जनतांत्रिक गठबंधन और सकारात्मक सत्ता के सोच से होगा। भारत को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक गुलामी से आजाद किसी सत्ता के संगठनात्मक संरचना के प्रधान संगठन के संपादक अथवा कारपोरेट घराने (व्यवसायी), नेता अभिनेता या पत्रकार के कारण नहीं बल्कि जनतांत्रिक गठबंधन के कारण मिला। बाकी क्या कहना विश्व में अनेकों उदाहरण मौजूद है कि। जिस देश की जनता ने देश को गुलामी से आज़ाद किया संविधान और संसद का निर्माण किया आज अर्धज्ञानी और अर्धशिक्षित शासकों की नकारात्मकता और घमंड के कारण गुलामी को मजबूर हैं। क्या कहना, जनता महामारी से परेशान हैं जन सेवक राजनीति में खुशहाल है, राजनीति व्यवसायीकरण की गुलाम है राजनेता मंहगाई से बेहाल है।


।।जय जवान जय किसान।। जय हिन्द।।

रविवार, 26 अप्रैल 2020

।। विश्वव्यापी महामारी ।।

विश्वव्यापी कोरोना महामारी के लिए सावधानी और सतर्कता के सारे आवश्यक संभव प्रयास के साथ कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोज़गार के क्षेत्र से प्राप्त आंकलन जरूरी सुझावों और सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार और सुरक्षा-कर्मियों के निगरानी में लॉकडाउन को समय-सारिणी स्लॉटिंग में खत्म किया जाना चाहिए। निषेधाज्ञा (कर्फ्यू) कोरोना महामारी का तात्कालिक एवं आंशिक समाधान है इसका असली उपयोगी समाधान टीका (वैक्सीन) और सावधानी ही है। अफसरशाही, तानाशाही, नेता-गिरी, कमज़ोर और ग़रीबों के शोषण के खिलाफ पारदर्शिता पूर्ण दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। ग़रीबों, श्रमिकों और कर्मचारियों के कार्य एवं उसके आवागमन का उचित प्रबंध सरकार के तरफ से होना चाहिए। सभी समाज को कोरोना महामारी अभियान से जोड़ा जाना चाहिए और कोरोना महामारी के बारे में जागरूकता और अवलोकन अभियान के लिए स्वयंसेवक के साथ-साथ महामारी विशेषज्ञों को नियुक्त करना चाहिए। हर एक घर और व्यक्ति के आधार कार्ड को महामारी परीक्षण-निरीक्षण के लिए जोड़ा जाना चाहिए। समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग को और अधिक सशक्त समृद्ध और शक्तिशाली बनाने की जरूरत है। देश की आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा के स्तर को सशक्त, समृद्ध और शक्तिशाली बनाए रखने के लिए सरकार को पारदर्शी और दुरदर्शी निति के साथ उचित, उपयोगी योजनाओं को निर्धारित तथा कार्यान्वित करना होगा। क्योंकि विकसित देश का लगभग हर एक नागरिक अपने जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक हैं और आत्मनिर्भर है। परन्तु विकासशील देश की ५०% जनता सरकार और सरकारी योजनाओं पर निर्भर है क्योंकि ?
शायद अमीर-ग़रीब का फर्क (अंतर) यहां परिश्रम से नहीं पारिश्रमिक और भूख से किया जाता है यहां नेताओं को भगवान माना जाता है। हमें इस प्रकार की धारणा को समाप्त करने की आवश्यकता है। जब तक हम अपने परिश्रम को ज्ञान और विज्ञान के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए साधन एवं संसाधनों के विस्तार पर बल देते हुए जागरूकता और आत्मनिर्भरता की धारणा को अपना नहीं लेते तब तक हमें यूं ही अमीरी-ग़रीबी के जाल और जंजाल में फंसे रहना होगा नेताओं को भगवान मानते रहना होगा। राम राज्य वापस तो नहीं आएगा लेकिन हमें श्री राम के आदर्शों को और भारत वर्ष के अनेकता में एकता की अवधारणा को बनाए रखने की जरूरत है। अंत में महाकवि रवींद्रनाथ जी की कुछ पंक्तियां जिनको समस्त विश्व एवं भारतवासी को चरितार्थ करने की कोशिश करनी चाहिए।।

जहां चित्त भय से शून्य हो जहां हम गर्व से माथा ऊंचा करके चल सकें 
जहां ज्ञान मुक्त हो 
जहां दिन-रात विशाल वसुधा को खंडों में विभाजित कर छोटे-और छोटे आंगन ना बनाए जाते हों 
जहां हर वाक्य दिल की गहराई से निकलता हो 
जहां हर दिशा में कर्म के अजस्त्र सोते फूटते हों 
निरंतर बिना बाधा के बहते हों 
जहां मौलिक विचारों की सरिता 
तुच्छम आचारों की मरू-रेती में ना खोती हो 
जहां पुरूषार्थ सौ-सौ टुकड़ों में बंटा हुआ ना हो 
जहां पर कर्म, भावनाएं, आनंदानुभूतियां 
सभी तुम्हारे अनुगत हों 
हे प्रभु, हे पिता । अपने हाथों से कड़ी थपकी देकर 
उसी स्वातंत्र्य जगत में इस सोते हुए भारत को जगाओ।

।। जय हिन्द जय भारत।।

शनिवार, 13 अप्रैल 2019

।। ये कलम है ।।

कलम शब्दों के संसार में कागज़ की धरती पे बहती जिंदगी की स्याही है।

कलम का फ़क़ीर कह रहा है ये कलम है संसार का पहला और आखिरी हथियार, जिंदगी का प्रारम्भ और अंत।

निर्जीव भी सजीव भी आविष्कार कर्ता की निर्माण-कर्ता है या निर्माण-कर्ता की आविष्कारक।

संसार का पहला जीव सजीव है या निर्जीव विज्ञान को चुनौती देता कलम का फकीर।

ये कलम है समय का राजा, रंक और यही फ़क़ीर ये कलम है संसार का वर्तमान, भूत और यही भविष्य।

ये कलम है मानव का ज्ञान-विज्ञान और तकदीर, ये कलम है संसार का शून्य और शिखर यही।

ये कलम है शब्दों के संसार में कागज़ की धरती पे बहती जिंदगी की स्याही।।

शनिवार, 30 मार्च 2019

।। सावधान मतदाता ।।

मतदाता चार प्रकार के होते हैं। पहले दैनिक मजदूरी करने वाला व्यक्ति है, जैसे कि दुकानदार और निचले दर्जे के कर्मचारी, जैसे कि मैं और चौकीदार आदि। दूसरा व्यक्ति मध्यम वर्ग का है, जैसे कि प्रबंधक, क्लर्क और उच्च श्रेणी के कर्मचारी आदि। तीसरा उच्च वर्ग है, जैसे कि छोटे-बड़े व्यापारी, कलाकार, साहित्यकार, पत्रकार और दलाल। चौथा धर्मनिरपेक्ष और जातिवादी प्रकार के है, जैसे कि वरिष्ठ नागरिक, किसान और सेवानिवृत्त व्यक्ति आदि। पहले और चौथे प्रकार के मतदाताओं की मतदान में महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि वे राजनीति पसंद करते हैं और इस प्रकार के मतदाता अधिक संख्या में होते हैं। ये मतदाता केवल राजनेता की प्रतिबद्धता के बारे में देख रहे होते हैं और नेताओं के प्रलोभन के झांसे मे आसानी से फँस जाते है।
लेकिन, दूसरे और तीसरे प्रकार के मतदाताओं को यह गंदी राजनीति पसंद नहीं है और वे केवल दान और मतदान द्वारा राजनीति को स्थिर करना चाहते हैं। इस प्रकार राजनीति में मतदाताओं और मतदान के बारे में विशाल दृष्टिकोण और अवसर हैं। कृपया प्रलोभन में न आकर सही नेता और पार्टी (दल) का चुनाव करें। अब बात करते हैं नेता और पार्टी की, पार्टी तीन प्रकार की है, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और निजी स्तर की, जिसमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की पार्टियों में नेताओं का स्तर भी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय रूप में होता है। क्षेत्रीय स्तर के नेता अपनी प्रतिबद्धता और समाज सेवा के द्वारा अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करते हैं। कुछ निजी दल के स्वतंत्र नेता है जिनका कार्य समर्थन और अ-समर्थन के द्वारा राजनीति को स्थिर करना होता है।
अंततः निष्कर्ष यह निकलता है कि पहले और चौथे प्रकार के मतदाताओं का रुझान, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल तथा नेताओं की और अधिक होता है क्योंकि इनके द्वारा मतदाताओं को अत्यधिक प्रलोभन और झांसा प्रदान किया जाता है। नेताओं का दृष्टिकोण समाज सेवा और राष्ट्र सेवा की ओर होना चाहिए, मगर आज के भूमंडलीकरण के दौर में नेता निजी स्वार्थ और विश्व में अपनी पहचान स्थापित करने और सत्ता में अपने आप को उच्च पद पर स्थापित करने के लिए राजनीति का व्यापार कर रहे हैं। ऐसे नेताओं के लिए समाज सेवा और राष्ट्र सेवा का कोई मतलब नहीं होता है। ये सिर्फ अपने और अपनी पार्टी (दल) की सेवा और विकास मे लगे रहते है। इस प्रकार के नेताओं से और पार्टियों से मतदाताओं को बच कर रहना आवश्यक है। सावधान मतदाता लोभ और झांसे में न आकर उनका ही चुनाव करें जो सच के कसौटी पर खरा हो। सोने का निर्माण सैकडों वर्षो के प्रक्रीया के उपरांत होता है। और सोने के सौ टुकड़े करने से उसका मूल्य कम नहीं होता है। इसी प्रकार से जो सैकडों वर्षो से राजनीति में स्थापित है, जो सच न बोले लेकिन झूठ बोल कर लोभ और झांसा न दे, जिनका जीवन दर जीवन समाज सेवा और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित हो जिन्होंने बलिदान त्याग और सच का राह चुना है आप उसी का चुनाव करें। हमें शिक्षित और सम्मानित नेतृत्व की जरूरत है। आज के समय में सच्चे का मुहँ काला और झूठे का बोल बाला है। हम भारतवासी सदैव विश्व में सत्य, त्याग और तपस्या के लिए उदाहरण हैं। हमारा इतिहास सनातन और स्वर्णिम है। जय हिंद जय भारत।

रविवार, 17 मार्च 2019

चौकीदार एक मज़ाक

चौकीदार के बारे में मज़ाक न करें, क्योंकि मेरी माँ और पिता भी चौकीदार हैं, और वे एक अच्छे जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे। किसी के पास राजा की तरह समृद्ध जीवन है, वह कभी चौकीदार नहीं था, फिर वह चौकीदार के संघर्ष को कैसे जान सकता है। केवल वह चौकीदार को निर्देशित कर सकता है, चौकीदार की तरह काम नहीं कर सकता। चौकीदार की कई मजबूरीयां होती हैं। वह अपने मालिक के लिए ईमानदार, सतर्क और ग़ुलाम होना चाहिए। वह अपने कर्तव्य के बारे में कोई स्व-निर्णय नहीं ले सकता है। वह केवल अपने मालिक और उसके संपत्ति की सुरक्षा के लिए बाध्य है। यदि एक चौकीदार एक अधिकारी और अमीर बन जाएगा, तो इसका मतलब है कि वह चौकीदारी के स्थान पर कुछ और काम कर रहा है। अर्थात वह कोई भ्रष्टाचार या संघर्ष कर रहा है। संघर्ष के कई प्रकार हैं। भ्रष्टाचार और अच्छे और बुरे काम संघर्ष का हिस्सा हैं। कौन अधिकारी और अमीर से चौकीदार बनना चाहता है। यह केवल एक प्रचार और आडम्बर है। यदि हम किसी अधिकारी और अमीर का मज़ाक बनाए तो उसका अपमान होगा, और वो हम चौकीदारो पर मानहानि का दावा करेगा लेकिन चौकीदार को चोर और न जाने क्या- क्या बोल कर मज़ाक बनाया जा रहा है। परिस्थितियां मनुष्य को चौकीदार, अमिर या गरीब और अधिकारी बनाती है। परिस्थिति कुछ भी हो सकती है। लेकिन आज की स्थिति और परिस्थिति के अनुसार कोई भी किसी का दास नहीं बनना चाहता। मजबूरी में कोई किसी का दास बनता है, और यदि अधिकारी और राजा ही मजबूर हो तो वो प्रजा (जनता) को उसका हक और अधिकार न तो दिला सकता है और न ही दे सकता है। गंगा उलटी दिशा में नहीं बह सकती, राजा जनता का चौकीदार कभी नहीं हो सकता है क्योंकि चौकीदारी का काम जनता का है राजा का नहीं, राजा को तो एक प्रधान न्यायाधीष और सेनापति होना चाहिए। यदि राजा अपने आप को चौकीदार कहता है तो इसका मतलब साफ है की वो किसी का दास (ग़ुलाम) है और वो जनता की नहीं बल्कि अपने मालिक की चौकीदारी कर रहा है। और यदि चौकीदार खुद को राजा कहता है तो इसका मतलब की वो कोई भ्रष्टाचार या षडयंत्र कर रहा है। सीधी बात है मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, परिस्थितियां मनुष्य की दास होनी चाहिए। जनता अपने संघर्ष मे व्यस्त है और राजा जनता के संघर्ष और खून पसीने की कमाई को अपने मालिक के लिये खर्च करने में व्यस्त और मस्त है। बाकी बहुत कुछ और है, इस मुद्दे पर बात करने के लिये। सोच तो शुरू हुई है समझ अभी बाकी है और समझ समय के हिसाब से लाख ठोकरों और संघर्ष के बाद आती है। इतिहास गवाह है, राज-तंत्र में तानाशाह होते है। लोकतंत्र और राजतंत्र में मूल फर्क यही है कि आप लोकतंत्र में अपने पसंदीदा व्यक्ति का चुनाव करते है देश या राज्य का नेतृत्व करने के लिए। और जब हम चुनाव कर लेते है तो ये पसंदीदा व्यक्ति लोकतंत्र के सहारे से राजतंत्र को स्थापित करते है। और राजतंत्र में शासक वर्ग नेतृत्व का चुनाव करता है। लोकतांत्रिक तरीके से राजनीति को लोकतंत्र के गणतंत्र को बचाना चाहिए। हमें भ्रष्टाचार और अराजकता के खिलाफ निष्पक्ष लोकतंत्र न्यायपालिका और निर्णय की आवश्यकता है। किसी चौकीदार की जरूरत नहीं है। जय हिंद।

शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

।। भ्रष्टाचार ।।

हम क्या कहें कहता है ये जमाना, भ्रष्ट नेताओं का लगा है जमावड़ा।
अरे भईया जरा हमें आज़माना जरा हमें आज़माना। 
कोई इधर उधर की बात हो तो पतली गलि के पिछले दरवाज़े से हमारे घर आना।
पार्टि के ओट में भ्रष्ट नेताओं के भोज में अपराधियों का है आना जाना।। 
अरे भईया जरा इनको आज़माना, जरा इनके सफेद पोस पर्दे तो हटाना।
इनको भी अहम है, जनता जनार्दन जरा इनको इनकी याद दिलाना।
हमें सुबह शाम है इनके कर्तव्यों को बताना, अरे भईया जरा मताधिकार दिखना।
देश का विकास, गरीब और गरीबि का नाश तो है नारा पर घनघोर घोटालों का है आना-जाना।।
अरे भईया जरा इनकी घनघोर घोटालों की काली घटा को हटाना।
दिलाना दिलाना जरा इनके वादों के जुमलो की याद दिलाना।।
छोटे मोटे गोल मटोल नेताओं की एक सभा को बुलाना फिर देखो इनके आभा को दिखाना।
गवाह है इसका गगन का अंनत आशियाना और ज़मीनी मंज़िल का ठिकाना जरा इनके मुख से मंत्री के मुखौटा को हटाना।।
जनता जनार्दन को बस जन गण मन गण का गित है गाना, रूखी सुखी खाना और गुदड़ी ओढ सो जाना।
हे भारतवासी वंदे मातरम तेरी कहानी, स्वराज है जिसकी निशानी ।।
हे भारतवासी अब-के राष्ट्र-धर्म को निभाना भ्रष्टाचार के विरूद्ध है तुझे मताधिकार के हथियार को चलाना।।
हम क्या कहें कहता है ये जमाना भ्रष्ट नीति से राजनीति में भ्रष्ट नेताओं का है आना जाना। 
राम संभालते है इनके काम ये संभाले सिर्फ दाम। 
रोजी रोटी का नाम नहीं और रोज़गार का इनको काम नहीं।। 
राजनीति इनका जन्मसिद्ध अधिकार, जिसमें व्यापार की चलती है इनकी दुकान। 
किसान इनके सियासी अखाड़े का पहलवान है और ये भ्रष्टाचार का बीज बोकर बगैर खेती के किसान हैं। 
मेरा प्राण प्रिय भारत महान।।

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) स्वराज

भगवान कृष्ण वासुदेव और देवकी के संतान थे। मथुरा के कारावास में उनका जन्म हुआ था और गोकुल में उनका लालन पालन हुआ था। यशोदा और नन्द उनके पालक माता पिता थे। ठीक वैसे ही हम भोजपुरीया भोजपुरी माँ के संतान हैं। हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है और हमारा लालन पालन हिन्दी माँ के आँचल में हुआ है। हिन्दी भाषा-भाषी और हिन्दी बोली से हमारे भोजपुरी भाषा (बोली) का कोई मतभेद नहीं है। लेकिन हिन्दी भाषा-भाषी को भोजपुरी भाषा के लोगो से मतभेद अवश्य है। हमें अपने भोजपुरी स्वराज के लिये एक आंदोलन की अत्यंत आवश्यकता है। आंदोलन में बलिदान, त्याग, तपस्या और स्वाभिमान की जरूरत है। उत्तर प्रदेश की राज भाषा हिन्दी और उर्दू है जबकि प्रदेश मे उर्दू अल्पसंख्यक है और भोजपुरी बहुसंख्यक इसके बावज़ूद भोजपुरी को अपने राज्य उत्तर प्रदेश में ही राज भाषा का दर्जा प्राप्त नहीं है ये एक विडम्बना ही नहीं बल्कि पूर्ण रूप से उपेक्षा है। भोजपुरी भाषा प्रमुख रूप में पश्चिमी बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उत्तरी झारखण्ड के क्षेत्रों में बोली जाती है। भाषा में बदलते वक़्त के साथ शब्द जुड़ते रहते हैं, वहीं कई बार कुछ शब्दों का प्रयोग बंद भी होने लगता है. भाषा में होनेवाले बदलावों को सहजता के साथ समझा जाना चाहिए। भाषा और बोली हर एक क्षेत्र में थोड़ी अलग होती है जो प्रमुख भाषा की उपभाषा अथवा उपबोली होती है। भोजपुरी वक्ताओं की संख्या लगभग १८ करोड़ है। इसके बावज़ूद भोजपुरी को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। शामिल न करने के लिए भारत सरकार तमाम तर्क कुतर्क प्रस्तुत करती है और हमारे खिलाफ साज़िश और षडयंत्र करके हमारे विकास और सुनहरे भविष्य मे बाधा उत्पन्न करके हमें विस्थापित और असंगठित करती रहती है। जिसका उद्देश्य केवल आर्थिक और राजनीतिक लाभ है।
भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) से विस्थापन के लिए मजबूर भोजपुरी भाषा भाषी अपने जीविका पार्जन के लिए देश के अन्य राज्य अथवा क्षेत्र में कठिन परिश्रम करने को मजबूर है और समय के अनुसार उनका शोषण, और बहिष्कार अन्य राज्यों के द्वारा किया जाता है। हम भोजपुरिया भाषा भाषी के लोगो को अपमानित भी किया जाता है जिसका उदाहरण अभी महाराष्ट्र और गुजरात का है जंहा से हमें बहुत अपमानित करके निकलने पर मजबूर किया गया और हम कुछ न कर पाए। जबकि हम जिस राज्य में अपने श्रम और परिश्रम का योगदान देते है उससे उसी राज्य का विकास होता है और मान सम्मान बढ़ता है। हमें तो सिर्फ और सिर्फ दो वक़्त की रोटी और कुछ धन ही प्राप्त होता है।
विस्थापन के दौरान कुछ भोजपुरिया जिस राज्य अथवा क्षेत्र में रहते है वो वहीं का होकर रह जाते और फिर अपनी मातृभाषा भोजपुरी को त्याग कर प्रवासी बन जाते है तथा उनकी अगली पीढ़ी भोजपुरी भाषा का परित्याग कर देती है फिर उनको भोजपुरी बोलने पढ़ने और लिखने में शर्म आती है। इस-प्रकार हम आज के भूमंडलीकरण के दौर में कह सकते है की हम बहु भाषी हो चुके है। जिसका कारण भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) में उचित रोज़गार और व्यापार का न होना है, हमारे पास साधन और संसाधन तो बहुत है लेकिन हम उसका उचित उपयोग नहीं कर पा रहे रहे। भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) में प्रमुख विश्वविद्यालय, महत्वपूर्ण सड़क, रेल और हवाई अड्डे है। लेकिन उसका उपयोग केवल बाहरी लोगो और पूंजीपति लोगो के द्वारा ही किया जाता है। कुछ गणमान्य व्यक्ति, राजनेता, अभिनेता, और व्यापारी जो भोजपुरिया है उन्होंने अच्छी शिक्षा, नौकरी, व्यापार और मान सम्मान पा लेने के बाद अपने अभिमान और लोभ के लिए अपने आप से किनारा कर लिया है अर्थात उनको समृद्धि की इतनी ज्यादा ललक हो गयी है की वो सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में ही अपना जीवन व्यतीत करते है। भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) से विस्थापित हो कर किसी अन्य समृद्ध और विकसित राज्य और शहर में अपना जीवन यापन कर रहे है। उदाहरण के तौर पर कई व्यक्ति विशेष है जिनका नाम नहीं लिखना चाहता हूं केवल संकेत ही काफी है।

राजनेता उत्तर प्रदेश से अपने धूर्त राजनीतिक लाभ के लिए जाति और धार्मिक समीकरण के आधार पर भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) को असंगठित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। पूर्वांचल क्षेत्र संगठित अपराध और भ्रष्टाचार के केंद्र रूप में अपमानित है। इसकी वजह आम जनता के लिए पर्याप्त शिक्षा और रोज़गार के अवसरों के अभाव है। भारत के किसी भी क्षेत्र के लोगों से अधिक शोषण ब्रिटिशों ने इस क्षेत्र के लोगों का किया क्योंकि इस क्षेत्र के लोगों मजबूत राष्ट्रवादी हैं और देश-भक्ति की भावना थी और ब्रिटिश राज के खिलाफ कड़ा विरोध किया।
भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) में प्रमुख विश्वविद्यालय, महत्वपूर्ण सड़क, रेल और हवाई अड्डे है जो उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है। 1991 में उत्तर प्रदेश की सरकार ने पूर्वांचल विकास निधि की स्थापना की जिसका उद्देश्य था क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं के लिये धन इकट्ठा करना जिससे भविष्य में संतुलित विकास के जरिए स्थानीय जरूरतों को पूरा करते हुए क्षेत्रीय असमानताओं का निवारण हो सके। लेकिन आजादी के 70 सालों बाद तक भी नहीं हो सका। सिर्फ पूर्वांचल के पिछड़ेपन के नाम पर वोटों की सियासत की जा रही है। हर चुनाव में विकास की बातें की जाती है मगर वोट लेने के बाद सभी राजनीतिक दल पूर्वांचल की बदहाली को भुला देते हैं। यही वजह है कि अब अलग राज्य की मांग तेजी से उठने लगी है। यूपी के 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा अलग राज्य बनाने की मांग कर रहा है। ये मांग पुरी तब होगी जब अन्य तिन राज्य पश्चिमी बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उत्तरी झारखण्ड के क्षेत्रों की जनता आंदोलन का आरम्भ करें तथा इन तिन राज्यों की सरकारों को विवश किया जाये भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) के गठन के लिये। अब तक कई जनपदों में जन अधिकार यात्राएं भी निकल चुका है। यत्रा से भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) का स्वराज सिद्ध नहीं होगा इसके लिये एक आंदोलन की आवश्यकता है, जिसमें त्याग, तपस्या और बलिदान तथा स्वाभिमान की जरूरत है। जैसे उदाहरण के लिये आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड का इतिहास गवाह है की किस प्रकार के संघर्ष से इन राज्यों का गठन हुआ और पूर्ण स्वराज स्थापित हुआ। इन राज्यों के गठन के बाद हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान का समग्र विकास निरंतर जारी है। तो फिर भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) के निर्माण और गठन के बाद भारतवर्ष का विकास दिन दुना और रात चौगुना होना निश्चित है।  भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) के निर्माण और गठन के लिये एक बार फिर पूर्ण स्वराज का आंदोलन प्रारम्भ करना होगा जिसका आरम्भ मैं कलम का फकीर बन कर चंद लकीरो के शब्दों से कर चुका हूं।। मैं इस प्रस्तुत लेख को भोजपुरी भाषा में भी लिख सकता था मगर भोजपुरी में लिखने के बाद इसको पढने और समझने वाले शायद भोजपुरी भाषा और बोली के लोग ही होते, जबकि मुझे भोजपुरी प्रदेश (पूर्वांचल) के स्वराज के लिये संपूर्ण भारत-वर्ष के जनमानस के चेतना को जागृत करने के लिये अपने पालन करता हिन्दी मां का उचित उपयोग ही उपयोगी और सिद्ध लगा। भोजपुरीया को प्रणाम और हिन्दी को नमस्कार। संस्कार ही भाषा का दुसरा रूप है।। प्रस्तुत लेख में बदलाव संभव है कृप्या सुझाव और सहयोग प्रदान करें।। जय हिंद जय भारत ।।

शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

।। किसान की कहानी।।

किसान की कहानी, मिट्टी है उसका बचपन, फसल उसकी जवानी।
कर्ज उसका बुढापा, सरकार उसकी लाचारी।।
किसान की कहानी, पसीना उसका मिट्टी का खून-पानी , अन्न अमृत का पानि।
किसान की कहानी, दाल भात खाना गुदड़ी ओढ सो जाना।
लाचारी का मातम, मौसम की मेहरबानी।।
किसान की कहानी, भारतवर्ष का आन-बान, मान-सम्मान है किसान।
सरकार खरपतवार किसान महान।।
सियासी अखाड़े का पहलवान है किसान।
मेरे घर के मंदिर का भगवान है किसान।।
किसान की कहानी, हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई, हिन्दुस्तान है किसान।
आज धरती माँ के आँचल में बेबस और लाचार है किसान।।
जय जवान जय किसान।।

शनिवार, 17 नवंबर 2018

मैं और मेरा वक्त

एहसान होगा तेरा ए वक्त अगर, मुझे मेरे वक्त से मिला दे ।
वक्त ने कहा तू बडा भोला है।
मैने कहा तू बडा बडबोला है।।
जब दुनिया न थी तब भी तू था,
मगर इतना बता तू क्या माँ से,
पहले आया।
वक्त थोडा घबड़ाया, और कहने
लगा दुनिया में सबकुछ मैने बनाया।
मैने कहा, मैं भोला-भाला ही सही
मुझे मेरी माँ ने तुझ जैसा रंग बदलना न सिखाया।
शुक्रिया मेरे वक्त, तू मिले या न मिले,
पर मेरी माँ ने वक्त पर मेरा,
वक्त बताया।
वक्त थोडा ठहरा, और कहने लगा
एहसान होगा मुझ पर तेरा अगर,
तू मुझे माँ से मिला दे ।।
मैने वक्त से कहा, तू मेरा हर एक वक्त मेरी माँ का बना दे ।।

मंगलवार, 15 नवंबर 2016

!! आजाद देश का गुलाम नोट !!

आर्थिक गुलामी के दौरान आज मिला था बाजार में ५०० का नोट, ये है तो बेजुबान पर इसने अपने बारे में जो कहा वो कुछ इस तरह से है, की मैं आजाद रहने वाला आज सरकार के कैद में हूँ और मेरी कीमत जो सबसे ज्यादा और महत्वपूर्ण थी उसकी जगह अब एक प्रधान सेवक ने ले ली है, कभी ५०० और हजार के नोट के आगे कोई सरकार, कोई सेवक बड़ा नहीं था और न ही कभी किसी एक खास व्यक्ति का मैं गुलाम नहीं था सब के लिए बराबर था और सब की जरूरत को ये नोट पूरा करता था लेकिन आज सबकी जरुरत को पूरा एक खास व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है और जनता वाह-वाह कर रही है !! आज कल उस खास व्यक्ति ने अपने हिसाब से सब की जरुरत को निश्चित कर दिया है की कौन कितने नोट निकाल सकता है क्या चलेगा और क्या बंद होगा, उचित रूप से जब मैं बाजार में था तो सबकी जरुरत पूरी करता था पर आज मेरा वज़ूद ही नहीं कुछ और है भी तो कुछ ज्यादा नहीं जैसे की मैं उस खास व्यक्ति के कहे अनुसार मज़बूर हूँ की बीमार को इलाज़ की जरुरत है पर मैं उसके जरुरत के हिसाब से उसके पास मौजूद नहीं हूँ, वयापारी को व्यपार की जरूरत है पर मैं उसको अपनी तरफ से कोई साधन और संसाधन नहीं दे सकता हूँ, लेकिन हो सकता है की जैसे मैं सरकार का गुलाम बन गया हूँ वैसे सारे वयापारी बन जाये तो शायद उनका वयापार फिर से चल पड़े, लोगो को शादी के लिए मेरी (नोट) जरुरत है और इस संकट का असर उन लोगो के ऊपर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है पर क्या कर सकते है, सबकी जरुरत नोट है और हर एक असम्भव को मैं सम्भव कर सकता हूँ पर ये तभी मुमकिन होगा जब मैं फिर से आजद होकर जनता और लोगो के बीच में घूम सकता हूँ लेकिन एक खास व्यक्ति और सरकार ने मुझे गुलाम बना दिया और फिर जनता और लोग खुद ही उसका गुलाम बन गयी फिर भी वाह-वाह मतलब की सभी लोग तो आमिर नहीं है और न सब वयापारी पर जो आमिर है और व्यपारी है वो मुझे आज भी आजाद देखना और रखना चाहते है, पर जो गरीब है और नौकर है वो तो पहले भी गरीबी का गुलाम था और जो किसी की नौकरी करता है वो भी अपने मालिक का गुलाम है और गुलामो को क्या फर्क पड़ता है आर्थिक गुलामी से वैसे भी इनकी जरुरत को पूरा करने वाला एक खास व्यक्ति विशेष तो है ही पर, मुझ नोट का क्या होगा मुझे कौन आजाद करवाएगा ये काम न तो किसी आमिर के बस की बात लग रही है और न किसी वयापारी के मगर जो गरीब, गरीबी का गुलाम है और जो नौकर मालिक का गुलाम है वो अपनी आजादी के लिए आवाज़ बुलंद करे तो मैं आजाद हो सकता हूँ !! जिन्हों ने मुझे गुलाम बनाया उनके अनुसार मुझे फिर से आजाद कर दिया जायेगा और ये दिक्कत थोड़े दिनों के लिए है पर मुझे तो लगता है की ये दिकत तब तक है जब तक ये गुलाम बनाने वाली सरकार है और सबके सर पर चढ़ कर बैठने वाला ये एक व्यक्ति विशेष है !! और मैं ये तो बताना ही भूल गया की ये जो वाह - वाह करने वाले लोग है वो इस सरकार के और इस खास व्यक्ति विशेष के खास गुलाम है जिनको सरकारी तौर पर अंदर ही अंदर खास सहूलियत मिला हुआ है जैसे की मुझे (नोट को) गुलाम बनाये जाने से पहले इन सबको सूचित कर दिया गया था की सब अपना इंतज़ाम कर ले और इन्होंने रातो रात अपना हिसाब किताब ठीक कर लिया, इसतरह से जो आजाद थे वो मज़बूर है गुलाम बनने के लिए !!  जय हिन्द जय भारत !!


गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

My Pen

My pen wants to write something unique, but emotion doesn't allow me. The line of my pen wants to make some unique words, but sentiments do not allow me. My pen is my power and my power does not order me to show the power of my pen. A pen can sketch everything, but a sketch cannot say more things. The pen is the line of words and line is the language of the world. Language is a line of words, but language is not an end of words. My pen with me, and the line is the power of my pen, but the language of the world cannot be defined in words. Pen only makes some lines and lines are making some words, and these words are called language in the world. Language making classifies humans of the world. My pen never wants to say the power of the pen because the pen is a pen and lines are pens of power. Can you tell me what the pen is, because without a line, a pen is nothing, and without words languages are nothing? Language can define only the areas of the World, but My pen can define the whole World.

  💪 ✍ 💅 👊


मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

What Is Love

Love is life, Life is Love. Love is everything, but love is not everything in life, because struggling and honesty are important for everythings. if it's true, but life is nothing without Love. I don't have my Love person, but still, my mom is Loving me & I would love her ever & forever. Once I had met my Love of life, but she left me for her first Love. I couldn't tell what her Love & what is. I can tell that she was my first & she is My last, after then, failure in Love. I know that Love is a thought, Love is a frame of mind, Love is a game of luck, Love is an ocean of sorrow, Love is Sea of happiness, Love is Love if it's True in its own words, Love is Love if it's possible without means. Love is The God and The God is Love. It should mean less. it should be free from the whole bound. Love is bound for Love. Love is only Love. Love is a valley of haven; Love is the fountain of happiness. Love is spring & spirit, Sprint of humans. Love is Love. Life is only a valuable Emotion, but still to be continued............Oh! My God. My broken heart is going to be broken again, and I am trying to bond the flinders of my heart. I am still alive for the love of my life. Love has a formula and the formula is that love your life then life will love you. Avoid your selfish love, then love will make you selfless. To be continued again...

सोमवार, 26 सितंबर 2016

My Alone Life..With Fake Friends:

I never want to use any drug, wine & smoking because I am not a drug addict and I have no Hobby for drugs, but some conditions & loneliness are compelling me to use. I don't want to do any wrong thing such as backbiting, attacking someone, telling lies, misbehaving, abusing, unnatural Love, flatter & also I don't want to see any wrong thing, never doing any fake with anyone, I have never done any misbehaving in own conscious condition with anybody. I accept that I have done some wrong thing in my unconscious condition whenever I used some drugs due to pressure or worry about my life & career goals. I accept that I have made some mistakes in my childhood when I was a minor. I am matured in my life and need much maturity in the future. Now my condition is so miserable, my life hasn't any goal and aim because I am an honest, true man, I can't do flatter, fake & wrong things, but I am still alive, fighting, struggling for a good future & career, I am alone in my struggle, nobody is with me. I think one day God will be with me. I always believe in God and God is great. I am afraid, depressed, and also using a few drugs but I am not a drug addict, & negative. I am tired due to fighting alone with my enemies but I am not hopeless and my friend I am still positive and hopeful and again ready to fight with more enemies. Everyone is calling me a drug addict, mad, and thinking about me that I am ill or sick but this is a misunderstanding about me just I am waiting for opportunity, destiny, and God's blessings whenever my opportunity, destiny, and God will with me. I will see everyone Who I am. I will give a response to my world about myself. Everyone is talking about the benefits & benefits of my loneliness because I am alone. Now be aware of my enemies and wise people because I am again in a conscious condition. I have some weaknesses but I was never weak. Alert haaaaaa...

The Present & Past of Nation:

Once upon a time, politics was a social worker for our nation & society. Many years ago socialist were fighting with social worries, but presently politics is going to be business & politicians are becoming businessmen, then a socialist is going to be an ideologist & they are only becoming an ideal & hero for society. In the past, the nation saint, Monk, yoga guru was free of cost for his services but presently they only give their own services at cost on the price. Many years ago our military was free from corruption & bribery but the military is suffering & sacrificed by militants and bribery. Now how we can find our true nation, how we can be an honest citizen, how we can be an ideal servant for the nation, how we can get again our incredible India. Who would become the legend for a corruption-free nation? How we can find a true person to stop the wrong things. Can we again find & Born our next Mahatma Gandhi, Swami Vivekananda, Abdullah Kalam, and Mangal Pandey, Neta Jee Subhash Chandra Boss, we just need to save our nation from political corruption, Social corruption, & also from militant, but how, who can stop it. The God, you, Me who will be.....Jai Hind Jai Bharat.....

The Rascals Politician & Atheist Population Of World

What's happening with the Constitution of states & nations in the world, everyone is involved with their own advice or ego for taking value or credit. No one is ready to tell the truth. Everyone wants the test or use of the best wine, best lady, best food about luxurious life. Just we need an honest & polite captaincy for the Nation, but there is no one available & looking. Every leader's want to make the dreams of their nation creator the Deen Dayal upadhyay, Mohan das Karamchand Gandhi and others in the world, but I am not understanding who will be, who can make the dreams of our nation creator. The whole world is busy with making true of own self think or dream, anyone can tell me how can be possible of the corruption-free world. The whole thing is that everything is money, is that right, if right then who was the inventor of currency in the world, I think it was a human, then how is the money bigger than humans. If humans are bigger than the currency of the whole world, then why are we fighting with each other. I can tell, because we wish to decide that which one religion and the God is Greater than great, who has great religion and history of the world, we ever think that, whom we called the Ram, Allah, Jesus, Rab & Khuda, these are unknown power of the world, no one can describe, who was The God, who is. They are equal & Together in heaven, but why not on the earth, these can be equal or together in our society. The idiot, humans, corrupted humans only need the luxury of life, that's why God
is not equal on earth. We know very well this world is going towards destruction, but we are not ready to understand What is wants & needs of God & nature. The time is beginning to end. Nature beguiling about the end of the world. The humans are so busy and stuck with a luxurious life, unnatural Love, and mindless thinking, I am also with them, because I am also a human. Where is the true epic of our God, who is the son of God, anyone available in the present whole world, that can say and prove, that I am the son of the God, I can explain that nature is the God. What is going on in the true world by the theist and atheist humans? Everybody is like, want, wish to show that we are great and our nation is Greater, our epic is too beyond and first in the world. I think God is Greater than great and nature is the inventor and creator of the world. After reading and thinking about these things, you are thinking and saying that I am mad. Yes, I am going and ready to be mad, but I never want to be a luxury man and unnatural lover. I had studied that' the truth is better than untruth, & true man wouldn't lose ever in his life, but I think I read or studied wrong, I am mad that's why I am saying. The rascal leader's, the politician is busy & struck with luxurious life and the whole peoples of world also wishing luxurious life. Haaaaaa, but we are going towards the end of our love. Natural disasters are coming soon as well as possible. Nature will be going to make true the end of the rascal, atheist world.

पेपर लीक का असली जिम्मेदार कौन?, शिक्षा व्यवस्था या सिस्टम?

भारतीय शिक्षा व्यवस्था: बदलाव, चुनौतियां और सुधार की आवश्यकता भारत की शिक्षा व्यवस्था में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं और आगे भी होत रहने च...